शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
हनुमान मंत्र
ॐ भारद्वाजस्तुताय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपऋषि-स्तुत
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
महर्षि भारद्वाज द्वारा वंदित देव को नमन।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
प्राचीन ऋषियों के सूक्ष्म ज्ञान की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
प्राचीन ऋषियों के सूक्ष्म ज्ञान की प्राप्ति।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥
ॐ प्राज्ञाय नमः
ॐ वैकुण्ठनगरवासिन्यै नमः
श्रीं विद्याधिष्ठातृदेव्यै स्वाहा वक्षः सदाऽवतु। (स्वरूप: विद्याधिष्ठात्री | लाभ: हृदय व वक्ष-स्थल की रक्षा | अर्थ: विद्या देवी मेरे वक्ष की रक्षा करें) 8
ॐ दयानिधये नमः
तद्विष्णोः परमं पदं सदा पश्यन्ति सूरयः। दिवीव चक्षुराततम्॥