ॐ दामोदराय विद्महे रुक्मिणीवल्लभाय धीमहि तन्नो कृष्णः प्रचोदयात् ॥
ॐ दामोदराय विद्महे रुक्मिणीवल्लभाय धीमहि तन्नो कृष्णः प्रचोदयात् ॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
इस मंत्र का अर्थ
हम दामोदर का ध्यान करते हैं, रुक्मिणी-वल्लभ का चिन्तन करते हैं। वे कृष्ण हमारी प्रज्ञा को जाग्रत करें 20।
इस मंत्र से क्या होगा?
दुःखों का निवारण, आत्मिक बल, सुखी दाम्पत्य जीवन और पारिवारिक शान्ति
विस्तृत लाभ
दुःखों का निवारण, आत्मिक बल, सुखी दाम्पत्य जीवन और पारिवारिक शान्ति 14।
जप काल
सन्ध्या-वन्दन के समय या वैवाहिक जीवन में शान्ति हेतु विशेष अनुष्ठान के रूप में।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ सहस्रार हुं फट् नमः
ॐ कस्तूरीभोजनप्रीतायै नमः
ॐ श्रीं ह्रीं भगवत्यै स्वाहा नेत्रयुग्मं सदाऽवतु। (स्वरूप: भगवती | लाभ: नेत्रों और सूक्ष्म दृष्टि की रक्षा | अर्थ: श्रीं ह्रीं स्वरूपा भगवती मेरे दोनों नेत्रों की रक्षा करें) 8
ॐ वाङ्मे मनसि प्रतिष्ठिता मनो मे वाचि प्रतिष्ठितम् आविरावीर्म एधि॥
ॐ मांसाशिने नमः।
या श्रीः स्वयं सुकृतिनां भवनेष्वलक्ष्मीः पापात्मनां कृतधियां हृदयेषु बुद्धिः। श्रद्धा सतां कुलजनप्रभवस्य लज्जा तां त्वां नताः स्म परिपालय देवि विश्वम्॥ 18