शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
हनुमान मंत्र
ॐ दशग्रीवकुलान्तकाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपरावण-कुल नाशक
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
रावण (दशग्रीव) के पूरे वंश का अंत करने वाले को नमन।
जप काल
नित्य प्रातः काल, लाल आसन पर बैठकर रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला से 108 नामों का क्रमशः उच्चारण करते हुए पुष्प अर्पित करें।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ ईशान्यां पातु भद्रो मे सर्वमंगलदायकः
सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥ 17
ॐ हृषीकेशाय नमः
त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥
ॐ श्रीं ह्रीं पातु मे ग्रीवां स्कन्धं मे श्रीं सदाऽवतु। (स्वरूप: श्रीं ह्रीं स्वरूपा | लाभ: गर्दन और कंधों की रक्षा | अर्थ: देवी मेरी ग्रीवा और स्कंध की रक्षा करें) 8
ॐ सत्यविक्रमाय नमः