शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
हनुमान मंत्र
ॐ हनूमते नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
स्वरूपवज्र-हनु (ठोड़ी) वाले
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जिनकी ठोड़ी इन्द्र के वज्र से प्रहारित/विशाल है, उन्हें नमस्कार।
जप काल
नित्य प्रातः काल, लाल आसन पर बैठकर रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला से 108 नामों का क्रमशः उच्चारण करते हुए पुष्प अर्पित करें।
इसे भी पढ़ें
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ अमेयात्मने नमः
ॐ ब्रह्मविद्यायै नमः
ऊर्ध्वे महाकाल भैरवाय नमः ऊर्ध्वे मां रक्ष रक्ष काल कंटकान् भक्ष भक्ष आवाहयाम्यहं इत्र तिष्ठ तिष्ठ हुं फट् स्वाहा।
ॐ श्रीमते नमः
ॐ नमो भगवते नरसिंहाय नमस्तेजस्तेजसे आविराविर्भव वज्रनख वज्रदंष्ट्र कर्माशयान् रन्धय रन्धय तमो ग्रस ग्रस ॐ स्वाहा। अभयमभयमात्मनि भूयिष्ठा ॐ क्ष्रौम्॥
ॐ त्रिकालज्ञानसम्पन्नायै नमः ॐ भुवनेश्वर्यै नमः।