शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
हनुमान मंत्र
ॐ हनूमते नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपवज्र-हनु (ठोड़ी) वाले
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जिनकी ठोड़ी इन्द्र के वज्र से प्रहारित/विशाल है, उन्हें नमस्कार।
जप काल
नित्य प्रातः काल, लाल आसन पर बैठकर रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला से 108 नामों का क्रमशः उच्चारण करते हुए पुष्प अर्पित करें।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये नित्यानन्दस्वरूपः तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ अनन्तरूपिण्यै राधायै नमः
ह्रीं विद्याधिष्ठातृदेव्यै स्वाहा ओष्ठं सदाऽवतु। (स्वरूप: विद्याधिष्ठात्री | लाभ: होठों और उच्चारण स्थान की रक्षा | अर्थ: विद्या की अधिष्ठात्री देवी मेरे होंठों की सदा रक्षा करें) 8
ॐ कारणव्रतपालिन्यै नमः
कामश्च मे सौमनसश्च मे भद्रं च मे श्रेयश्च मे...
ॐ इलापतये नमः