दोर्भिर्युक्ता चतुर्भिः (अगस्त्य रचित)
दोर्भिर्युक्ता चतुर्भिः स्फटिकमणिनिभैरक्षमालान्दधाना। हस्तेनैकेन पद्मं सितमपि च शुकं पुस्तकं चापरेण॥ भासा कुन्देन्दुशङ्खस्फटिकमणिनिभा भासमानाऽसमाना। सा मे वाग्देवतेयं निवसतु वदने सर्वदा सुप्रसन्ना॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
जो चार भुजाओं से युक्त हैं, स्फटिक की माला, श्वेत कमल, तोता और पुस्तक धारण करती हैं, वे सुप्रसन्न वाग्देवता मेरे मुख में सदा निवास करें।
इस मंत्र से क्या होगा?
वदन (मुख) पर सदा वाग्देवी की प्रसन्नता का वास
विस्तृत लाभ
वदन (मुख) पर सदा वाग्देवी की प्रसन्नता का वास।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ब्रह्मासि रुद्रस्त्वमिन्द्रस्त्वमग्निस्त्वं वायुस्त्वं सूर्यस्त्वं चन्द्रमास्त्वं ब्रह्मभूर्भुवःस्वरोम्॥
ॐ कदलीपुष्पसम्प्रीतायै नमः
ॐ देवसेनापतये नमः
ॐ चण्डविक्रमाय नमः
वेताल शक्ति शर कार्मुक चक्र खट्वाङ्ग मुद्गर गदाम् अङ्कुश नागपाशान् । शूलं च कुन्तं परशुं ध्वजमुद्वहन्तं वीरं गणेशमरुणं सततं स्मरामि ॥
ॐ सर्वाद्यायै नमः