शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
हनुमान मंत्र
ॐ दुर्गमतायै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनामावली मंत्र | जप समय: प्रातः या घोर संकट काल |
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो दुर्गम विचारों और दर्शनों की जननी हैं।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
त्वं वाङ्मयस्त्वं चिन्मयः ॥ त्वमानन्दमयस्त्वं ब्रह्ममयः ॥ त्वं सच्चिदानन्दाऽद्वितीयोऽसि ॥ त्वं प्रत्यक्षं ब्रह्मासि ॥ त्वं ज्ञानमयो विज्ञानमयोऽसि ॥
हौं (Haum)
ॐ सोमनन्दनाय नमः
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये भूतभविष्यत् तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
नारायणाद् ब्रह्मा जायते। नारायणाद् रुद्रो जायते।
ॐ मायिने नमः