शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
हनुमान मंत्र
ॐ हृदयं योगिसाध्यश्च निवासं पातु मे हरिः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपहृदय / योग-साध्य स्वरूप
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
योगियों द्वारा अपनी साधना से प्राप्त किए जाने वाले हरि मेरे हृदय की रक्षा करें। (हृदय रोगों से रक्षा)।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ शान्तायै नमः
ॐ ह्रीं जिह्वाग्रवासिन्यै स्वाहाऽग्निदिशि रक्षतु। (अर्थ: जिह्वाग्र में बसने वाली देवी आग्नेय कोण में रक्षा करें) 8
ॐ ईश्वराय नमः
ॐ अमोघदृशे नमः
देव्या यया ततमिदं जगदात्मशक्त्या निश्शेषदेवगणशक्तिसमूहमूत्र्या। तामम्बिकामखिलदेवमहर्षिपूज्यां भक्त्या नताः स्म विदधातु शुभानि सा नः॥ 18
ॐ दूषणत्रिशिरोहन्त्रे नमः