शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
हनुमान मंत्र
ॐ इन्द्रजित्प्रहितामोघब्रह्मास्त्रविनिवारकाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपब्रह्मास्त्र-सहनकर्ता
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
मेघनाद के ब्रह्मास्त्र का सम्मान कर उसे स्वेच्छा से सहन करने वाले को नमन।
जप काल
नित्य प्रातः काल, लाल आसन पर बैठकर रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला से 108 नामों का क्रमशः उच्चारण करते हुए पुष्प अर्पित करें।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ कूर्चजपपरायणायै नमः
ॐ मेधा देवी जुषमाणा न आगाद्विश्वाची भद्रा सुमनस्यमाना। त्वया जुष्टा नुदमाना दुरुक्तान बृहद्वदेम विदथे सुवीराः॥
कराभ्यां परशुं चापं दधानं रेणुकात्मजं। जामदग्न्यं भजे रामं भार्गवं क्षत्रियान्तकं॥
रुं ह्रीं रुरवे नमः।
ॐ शिं रैं स्वतन्त्रशक्तिधाम्ने वामदेवात्मने अनामिकाभ्यां नमः
ॐ रविचन्द्राग्निलोचनाय नमः