ज्ञानं देहि स्मृतिं देहि (याज्ञवल्क्य कृत)
ज्ञानं देहि स्मृतिं देहि विद्यां देहि देवते। प्रतिष्ठां कवितां देहि शक्तिं शिष्यप्रबोधिकाम्॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
हे देवी! मुझे ज्ञान, स्मृति, विद्या, प्रतिष्ठा, कविता की शक्ति और शिष्यों को शिक्षित करने की सामर्थ्य प्रदान करें।
इस मंत्र से क्या होगा?
शिक्षकों और गुरुओं के लिए शिष्यों को पढ़ाने की शक्ति (प्रबोधिका शक्ति) और कवित्व की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
शिक्षकों और गुरुओं के लिए शिष्यों को पढ़ाने की शक्ति (प्रबोधिका शक्ति) और कवित्व की प्राप्ति।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्। वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥
ॐ शाश्वताय नमः
अभयवरदहस्तः पाशदन्ताक्षमाला सृणिपरशुदधानो मुद्गरं मोदकं च । फलमधिगत सिंहः पञ्चमातङ्गवक्त्रो गणपतिरतिगौरः पातु हेरम्बनामः ॥
ॐ उपेन्द्राय नमः
कथं जयेयुर्वीरेन्द्राः कवचैर्नावृताङ्गकाः। प्रयान्ति भीता रामस्य वर्मणा वीक्ष्य रक्षितम्॥
ॐ निरुपद्रवाय नमः।