शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
हनुमान मंत्र
ॐ कंसारये नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-जप मन्त्र; ये मन्त्र वासुदेव, बाल-गोपाल, और द्वारकाधीश स्वरूपों का पूर्ण प्रतिनिधित्व करते हैं।
स्वरूपकंस-अरि
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
कंस के अरि (शत्रु) को नमस्कार।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
क्रूर शासक से रक्षा
विस्तृत लाभ
क्रूर शासक से रक्षा
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ दिव्यतेजसे नमः।
ॐ कवये नमः
श्री राम लक्ष्मण जानकी, जय बोलो हनुमान की
इडा देवहूर्मनुर्यज्ञनीर्बृहस्पतिरुक्थामदानि शंसिषद् विश्वेदेवाः सूक्तवाचः पृथिविमातर्मा मा हिंसीर्मधु मनिष्ये मधु जनिष्ये मधु वक्ष्यामि मधु वदिष्यामि मधुमतीं देवेभ्यो वाचमुद्यासँशुश्रूषेण्यां मनुष्येभ्यस्तं मा देवा अवन्तु शोभायै पितरोऽनुमदन्तु॥
सर्वाबाधाविनिर्मुक्तो धनधान्यसुतान्वितः। मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशयः॥ 17
ॐ रावणेशस्तोत्रसाममनोहराय नमः