गणेश पंचरत्न स्तोत्र (श्लोक 1)
मुदाकरात्तमोदकं सदा विमुक्तिसाधकं कलाधरावतंसकं विलासिलोकरक्षकम् । अनायकैकनायकं विनाशितेभदैत्यकं नताशुभाशुनाशकं नमामि तं विनायकम् ॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
इस मंत्र का अर्थ
जिनके हाथों में आनंददायक मोदक है, जो मुक्ति के साधक हैं, जिन्होंने सिर पर चंद्रमा धारण किया है, अनाथों के नायक हैं, उन विनायक को मैं नमन करता हूँ।
इस मंत्र से क्या होगा?
मोक्ष की प्राप्ति और अशुभ घटनाओं का तत्काल नाश
विस्तृत लाभ
मोक्ष की प्राप्ति और अशुभ घटनाओं का तत्काल नाश।
जप काल
नित्य प्रातःकाल गान स्वरूप में।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ श्रीं ह्रीं पातु मे ग्रीवां स्कन्धं मे श्रीं सदाऽवतु। (स्वरूप: श्रीं ह्रीं स्वरूपा | लाभ: गर्दन और कंधों की रक्षा | अर्थ: देवी मेरी ग्रीवा और स्कंध की रक्षा करें) 8
ॐ कृपामय्यै नमः
मनोजवम् मारुततुल्यवेगम् जितेन्द्रियम् बुद्धिमताम् वरिष्ठम्। वातात्मजम् वानरयूथमुख्यम् श्रीरामदूतम् शरणम् प्रपद्ये॥
ॐ विजयाय नमः
असौ योऽवसर्पति नीलग्रीवो विलोहितः। उतैनं गोपा अदृशन्नदृशन्नुदहार्यः। उतैनं विश्वा भूतानि स दृष्टो मृडयाति नः॥
ॐ योगिने नमः