गणेश पंचरत्न स्तोत्र (श्लोक 1)
मुदाकरात्तमोदकं सदा विमुक्तिसाधकं कलाधरावतंसकं विलासिलोकरक्षकम् । अनायकैकनायकं विनाशितेभदैत्यकं नताशुभाशुनाशकं नमामि तं विनायकम् ॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
जिनके हाथों में आनंददायक मोदक है, जो मुक्ति के साधक हैं, जिन्होंने सिर पर चंद्रमा धारण किया है, अनाथों के नायक हैं, उन विनायक को मैं नमन करता हूँ।
इस मंत्र से क्या होगा?
मोक्ष की प्राप्ति और अशुभ घटनाओं का तत्काल नाश
विस्तृत लाभ
मोक्ष की प्राप्ति और अशुभ घटनाओं का तत्काल नाश।
जप काल
नित्य प्रातःकाल गान स्वरूप में।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
शूलटङ्कपाशदण्डपाणिमादिकारणं श्यामकायमादिदेवमक्षरं निरामयम्।
ॐ विष्णुपत्न्यै नमः
सूक्ष्मातिसूक्ष्मं कलिलस्य मध्ये विश्वस्य स्रष्टारमनेकरूपम्
महेन्द्रे वै गिरिश्रेष्ठे रामं नित्यम् उपासते। ऋषयो वेदविदुषो गन्धर्वाप्सरसस्तथा॥
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता। या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥ या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा पूजिता। सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥
ॐ तपोरूपाय विद्महे ब्रह्मचारिणे धीमहि तन्नो वामनः प्रचोदयात्।