हनुमान मंत्र
नितम्बबिम्बरुलम्बमानपुष्पमेखले प्रशस्तरलकिङ्किणीकलापमध्यमञ्जुले। करीन्द्रशुण्डदण्डिकாவरोहसौभगोरुके कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
पुष्पों की मेखला और बजती हुई रत्न किंकिणी धारण करने वाली, गजराज की सूंड के समान सुंदर जंघाओं वाली राधे, कृपा दृष्टि डालें।
इस मंत्र से क्या होगा?
लाभ: भौतिक आकर्षण से मुक्ति
विस्तृत लाभ
लाभ: भौतिक आकर्षण से मुक्ति।
टिप्पणी
यहाँ इस सिद्ध स्तोत्र के सभी 19 श्लोकों को मंत्र रूप में, उनके अर्थ और लाभ सहित प्रस्तुत किया गया है। सभी का
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
गुरु गृह गए पढ़न रघुराई। अलप काल विद्या सब आई॥
ॐ वज्रहस्तसुतावल्लीवामदक्षिणसेविताय नमः
ॐ अनेकनेत्राय नमः।
पाँचों त्रिशेम चलें, लांगुरिया सलार चलें। भीम की गदा चले, हनुमान की हाँक चले। नाहर की धाक चलै, नहीं चलै, तो हजरत सुलेमान के तखत की दुहाई है। एक लाख अस्सी हजार पीर व पैगम्बरों की दुहाई है। चलो मन्त्र, ईश्वर वाचा। गुरु का शब्द साँचा।
मयि मेधां मयि प्रजां मय्यग्निस्तेजो दधातु। मयि मेधां मयि प्रजां मयीन्द्र इन्द्रियं दधातु। मयि मेधां मयि प्रजां मयि सूर्यो भ्राजो दधातु॥
ॐ वेदान्तसारसन्दोहाय नमः