भार्गव कवच (सभा-विजय एवं वाक्-सिद्धि)
सभासु वदतां श्रेष्ठो राज्ञां भवति च प्रियः। वैदिकं तान्त्रिकं चैव मान्त्रिकं ज्ञानमुत्तमम्॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
...वह व्यक्ति सभाओं में बोलने वालों में सबसे श्रेष्ठ और राजाओं का प्रिय हो जाता है। उसे वैदिक, तांत्रिक और मान्त्रिक—तीनों प्रकार का उत्तम ज्ञान स्वतः प्राप्त हो जाता है।
इस मंत्र से क्या होगा?
उत्कृष्ट वाक्-सिद्धि, सभा में सम्मान, और अधिकारियों (राजाओं) का परम प्रिय होना
विस्तृत लाभ
उत्कृष्ट वाक्-सिद्धि, सभा में सम्मान, और अधिकारियों (राजाओं) का परम प्रिय होना।
जप काल
वाद-विवाद, न्यायालय या साक्षात्कार से पूर्व।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
पत्नीं मनोरमां देहि मनोवृत्तानुसारिणीम्। तारिणीं दुर्गसंसारसागरस्य कुलोद्भवाम्॥ 42
ॐ ह्रीं ग्रीं ह्रीं ॥
रक्षत्वसौ माध्वनि यज्ञकल्पः स्वदंष्ट्रयोद्धृतधरो वराहः
नमो भगवते फट् भैरवाय... आकर्षय-2 आवेशय-2 मोहय-2 भ्रामय-2... ह्रां ह्रीं त्रिपुरतांडवाय अष्टभैरवाय भाषय-2 स्वाहा।
ॐ कङ्कालमाल्यधारिण्यै नमः
ॐ दक्षिणां वृषभानुजा पातु।