शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
हनुमान मंत्र
ॐ सर्ववासाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-मंत्र
स्वरूपसबमें बसने वाले
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो सभी चराचर प्राणियों के भीतर चेतना रूप में निवास करते हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
सर्वदृष्टि
विस्तृत लाभ
सर्वदृष्टि
जप काल
नित्य
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
अवतु माम् ॥ अवतु वक्तारम् ॥ अवतु श्रोतारम् ॥ अवतु दातारम् ॥ अवतु धातारम् ॥ अवानूचानमव शिष्यम् ॥ अव पश्चात्तात् ॥ अव पुरस्तात् ॥ अवोत्तरात्तात् ॥ अव दक्षिणात्तात् ॥ अव चोर्ध्वात्तात् ॥ अवाधरात्तात् ॥ सर्वतो मां पाहि पाहि समन्तात् ॥
ॐ हरये नमः
ॐ त्रिलोकरक्षकाय नमः
ॐ करमालाकरप्रियायै नमः
ॐ जलशायिने नमः
ॐ देवकीनन्दनाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो कृष्णः प्रचोदयात् ॥