शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
देवी अथर्वशीर्ष मूल मंत्र (वेदोक्त)
ॐ सर्वे वै देवा देवीमुपतस्थुः कासि त्वं महादेवीति। साब्रवीत्- अहं ब्रह्मस्वरूपिणी। मत्तः प्रकृतिपुरुषात्मकं जगत्। शून्यं चाशून्यं च॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारउपनिषद मंत्र |
स्वरूपपरब्रह्म स्वरूपा आद्या शक्ति
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
आत्मबोध, परमतत्व का ज्ञान और निर्गुण-सगुण का भेद मिटना
विस्तृत लाभ
आत्मबोध, परमतत्व का ज्ञान और निर्गुण-सगुण का भेद मिटना 43।
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ॐ भक्तसाम्राज्यभोगदाय नमः
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ॐ कालकालाय विद्महे कालभैरवाय धीमहि तन्नो भैरवः प्रचोदयात्॥
गजेन्द्रवदनं साक्षाच्चलकर्ण सुचामरम् । हेमवर्णं चतुर्बाहुं पाशाङ्कुशधरं वरम् ॥ स्वदन्तं दक्षिणे हस्ते सव्ये त्वाम्रफलं तथा । पुष्करे मोदकं चैव धारयन्तमनुस्मरेत् ॥
ॐ श्रीकृष्णाङ्गसदाध्याय्यै नमः