राधावल्लभ सम्प्रदाय गुरु-इष्ट मंत्र
ॐ श्री राधावल्लभाय हरिवंशप्रियाय नमो नमः
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
जो श्री हित हरिवंश के अत्यंत प्रिय हैं, उन श्री राधावल्लभ को बारंबार प्रणाम।
इस मंत्र से क्या होगा?
गुरु (हित हरिवंश) की कृपा से युगल निकुंज-लीला में प्रवेश और प्रेम रस की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
गुरु (हित हरिवंश) की कृपा से युगल निकुंज-लीला में प्रवेश और प्रेम रस की प्राप्ति 30।
जप काल
ध्यान और मानसी सेवा के समय 108 बार।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
बिस्व भरन पोषन कर जोई। ताकर नाम सत्य अस होई॥
ॐ ह्रां ह्रीं ॐ नमो भगवते महा-वीर-वीराय सर्वदुःख निवारणाय ग्रहमण्डल सर्वभूतमण्डल सर्व-पिशाच-मण्डलोच्चाटन भूत-ज्वर एकाहिक-ज्वर द्वयाहिक-ज्वर त्र्याहिक-ज्वर चातुर्थिक-ज्वर संताप-ज्वर विषम-ज्वर ताप-ज्वर माहेश्वर-वैष्णव-ज्वरान् छिन्दि-छिन्दि यक्ष ब्रह्मराक्षस भूत-प्रेत-पिशाचान् उच्चाटय-उच्चाटय स्वाहा।
ॐ स्वरूपाय नमः
ॐ अज्ञाननाशिन्यभीष्टदायै नमः
ॐ सुराध्यक्षाय नमः
ॐ कपालार्घ्यप्रियप्राणायै नमः