त्वं देवि सरस्वत्यवा
त्वं देवि सरस्वत्यवा वाजेषु वाजिनि। रदा पूषेव नः सनिम्॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
हे दिव्य सरस्वती! अन्न एवं शक्ति से संपन्न तुम संग्रामों (बौद्धिक या भौतिक) में हमारी रक्षा करो और पूषा देवता के समान हमें धन-संपत्ति (ज्ञान रूपी) प्रदान करो।
इस मंत्र से क्या होगा?
विवादों (शास्त्रार्थ) में विजय और बौद्धिक संघर्षों में सफलता
विस्तृत लाभ
विवादों (शास्त्रार्थ) में विजय और बौद्धिक संघर्षों में सफलता।
जप काल
शास्त्रार्थ, वाद-विवाद प्रतियोगिता या परीक्षा से पूर्व।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ देव्यै नमः
ॐ स्यमन्तकमणेर्हर्त्रे नमः
ॐ सर्वात्मने नमः
ॐ ह्रः ॐ सौं ॐ वैं ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीजयजय चण्डिकायै नमः। ॐ स्वीं स्वीं विध्वंसय विध्वंसय ॐ प्लूं प्लूं प्लावय प्लावय... (अति विस्तृत तांत्रिक शृंखला)... ॐ चामुण्डायै विच्चे स्वाहा। मम सकल मनोरथं देहि देहि, सर्वोपद्रवं निवारय निवारय... भञ्जय भञ्जय ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं स्वाहा॥
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये अष्टवसवः तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ डम्भाय नमः