शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्री लक्ष्मी-नरसिंह महामंत्र
ॐ श्रीं ह्रीं जय लक्ष्मी प्रियाय नित्य प्रमुदित चेतसे लक्ष्मी स्रितार्थ देहाय श्रीं ह्रीं नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारवैष्णव मंत्र
स्वरूपलक्ष्मी-नरसिंह (शान्त स्वरूप)
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो माता लक्ष्मी के प्रिय हैं, जिनका चित्त नित्य आनंदित है, जिनके स्वरूप में लक्ष्मी विराजमान हैं, उन 'श्रीं ह्रीं' बीज स्वरूप भगवान को नमस्कार है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
घोर दरिद्रता का नाश, धन-समृद्धि की प्राप्ति, और उग्र व सौम्य ऊर्जा का आध्यात्मिक संतुलन
विस्तृत लाभ
घोर दरिद्रता का नाश, धन-समृद्धि की प्राप्ति, और उग्र व सौम्य ऊर्जा का आध्यात्मिक संतुलन।
जप काल
नित्य 56 या 108 बार जप। सिद्धि हेतु 3 लाख जप का आगमिक विधान है।
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