शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
सर्वमंगला नित्या मंत्र
स्वौं (Svaum)
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारएकाक्षर नित्या मंत्र
स्वरूपसर्वमंगला (14वीं नित्या)
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
सर्व-मंगलमयी देवी को नमन।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
सर्व-कल्याण और शून्याकाश में विचरण (खेचरी) की सिद्धि
विस्तृत लाभ
सर्व-कल्याण और शून्याकाश में विचरण (खेचरी) की सिद्धि।
जप काल
मूलाधार से आज्ञा चक्र तक न्यास।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
पाँचों त्रिशेम चलें, लांगुरिया सलार चलें। भीम की गदा चले, हनुमान की हाँक चले। नाहर की धाक चलै, नहीं चलै, तो हजरत सुलेमान के तखत की दुहाई है। एक लाख अस्सी हजार पीर व पैगम्बरों की दुहाई है। चलो मन्त्र, ईश्वर वाचा। गुरु का शब्द साँचा।
अघोरेभ्योऽथ घोरेभ्यो घोरघोरतरीभ्यश्च। सर्वतः शर्व सर्वेभ्यो नमस्ते रुद्ररूपेभ्यः॥
ॐ कपर्दीशकृपान्वितायै नमः
ॐ राजराजेश्वरीपुत्राय नमः
ॐ श्रद्धायै नमः
ॐ ज्वालाचक्राय स्वाहा – शिरसे स्वाहा