शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
हनुमान मंत्र
ॐ त्रिविक्रमाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपत्रिविक्रम
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
तीन पगों में तीनों लोकों को नापने वाले को नमन।
जप काल
प्रवास या लंबी यात्रा के समय
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ क्रौञ्चदारणाय नमः
अनेकमन्त्रनादमञ्जुनूपुरारवस्खलत्समाजराजहंसवंशणिक्वाणातिगौरवे। विलोलहेमवल्लरीविडम्बिवारुचङ्क्रमे कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥
आग्नेये रूरु भैरवाय नमः आग्नेये मां रक्ष रक्ष काल कंटकान् भक्ष भक्ष आवाहयाम्यहं इत्र तिष्ठ तिष्ठ हुं फट् स्वाहा।
ॐ सरस्वत्यै च विद्महे ब्रह्मपुत्र्यै च धीमहि। तन्नो देवी प्रचोदयात्॥
ॐ करमालाप्रतोषितायै नमः
ॐ पद्माक्ष्यै नमः