शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
हनुमान मंत्र
ॐ वर्णिनें नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-मंत्र
स्वरूपब्रह्मचारी वेश
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो तपस्या के लिए ब्रह्मचारी के वेष (वर्णी) को धारण करते हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
ब्रह्मचर्य
विस्तृत लाभ
ब्रह्मचर्य
जप काल
नित्य
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ भूतभृते नमः
ॐ महायोगिने नमः
ॐ तत्सत् भूर्भुवः स्वः तस्मै परब्रह्मणे नमः (गोपाल-तापनी में विभिन्न वर्णनों के साथ प्रयुक्त)
ॐ अजायै नमः
ॐ चण्डविक्रमाय नमः
ॐ हनुमान पहलवान पहलवान, बरस बारह का जबान, हाथ में लड्डू मुख में पान, खेल खेल गढ़ लंका के चौगान, अंजनी का पूत, राम का दूत, छिन में कीलौ नौ खंड का भूत, जाग जाग हड़मान हुँकाला, ताती लोहा लंकाला, शीश जटा डग डेरू उमर गाजे, वज्र की कोठड़ी ब्रज का ताला, आगे अर्जुन पीछे भीम, चोर नार चंपे ने सींण, अजरा झरे भरया भरे, ई घट पिंड की रक्षा राजा रामचंद्र जी लक्ष्मण कुँवर हड़मान करें।