शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
स्कंद स्तुति
वेदान्तार्थस्वरूपाय वेदान्तार्थविधायिने । वेदान्तार्थविदे नित्यं विदिताय नमो नमः ॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारश्लोक 2
स्वरूपवेदांत-स्वरूप
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
वेदांत के अर्थ स्वरूप, वेदांत का विधान करने वाले और वेदांत के ज्ञाता भगवान को नमस्कार है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
वेदों और वेदांत के गूढ़ अर्थों की समझ
विस्तृत लाभ
वेदों और वेदांत के गूढ़ अर्थों की समझ।
जप काल
स्वाध्याय के समय।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ सिद्धिदाय नमः।
ॐ यमस्तुत्यायै नमः
सिन्दूराभमिभाननं त्रिनयनं च पाशाङ्कुशौ बिभ्राणं मधुमत्कपालमनिशं साद्विन्दुमौलिं भजे । पुष्ट्या श्लिष्टतनुं ध्वजाग्रकरया पद्मोल्लसद्धस्तया तद्योन्याहितपाणिमात्तवसुमत पात्रोल्लसत्पुष्करम् ॥
भयार्तस्वजनत्राणतत्परं धर्मतत्परम्। गतगर्वप्रियं शूरं जमदग्निसुतुं मतम्॥
ॐ विकृत्यै नमः
ॐ तमालश्यामलाकृतये नमः