शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
हनुमान मंत्र
ॐ विदुराक्रूरवरदाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-जप मन्त्र; ये मन्त्र वासुदेव, बाल-गोपाल, और द्वारकाधीश स्वरूपों का पूर्ण प्रतिनिधित्व करते हैं।
स्वरूपभक्त-वत्सल
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
विदुर और अक्रूर को वरदान (कृपा) देने वाले को नमस्कार।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
संत-कृपा हेतु
विस्तृत लाभ
संत-कृपा हेतु
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ सर्वैश्वर्यप्रदायिन्यै नमः
सरस्वति नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि। विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु मे सदा॥
ॐ आश्रिताखिलदात्रे नमः
ॐ जगत्पालाय नमः
गजेन्द्रवदनं साक्षाच्चलकर्ण सुचामरम् । हेमवर्णं चतुर्बाहुं पाशाङ्कुशधरं वरम् ॥ स्वदन्तं दक्षिणे हस्ते सव्ये त्वाम्रफलं तथा । पुष्करे मोदकं चैव धारयन्तमनुस्मरेत् ॥
ह्रीं भैरव भयंकरहर मां रक्ष-रक्ष हुं फट् स्वाहा।