शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
हनुमान मंत्र
ॐ वृषभासुरविध्वंसिने नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-जप मन्त्र; ये मन्त्र वासुदेव, बाल-गोपाल, और द्वारकाधीश स्वरूपों का पूर्ण प्रतिनिधित्व करते हैं।
स्वरूपअरिष्टासुर-नाशक
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
अरिष्टासुर (वृषभासुर) का विध्वंस करने वाले को नमस्कार।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
पशुओं की रक्षा हेतु
विस्तृत लाभ
पशुओं की रक्षा हेतु
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
षडाननं चन्दनलेपिताङ्गं महोरसं दिव्यमयूरवाहनम् । रुद्रस्य सूनुं सुरलोकनाथं ब्रह्मण्यदेवं शरणं प्रपद्ये ॥
ॐ ऐं वाग्देव्यै विद्महे कामराजाय धीमहि। तन्नो देवी प्रचोदयात्॥
ॐ केसरिसुताय नमः
बलं च मे ओजश्च मे सहश्च मे आयुश्च मे...
ॐ संसारभयतः पातु मृत्योर्मृत्युर्-नृकेसरी
ॐ क्लीं वीं रूं ध्रूं घ्नीं ह्रीं बटुक भैरवाय नमः स्वाहा।