शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
सुब्रह्मण्य पंचरत्नम्
षडाननं चन्दनलेपिताङ्गं महोरसं दिव्यमयूरवाहनम् । रुद्रस्य सूनुं सुरलोकनाथं ब्रह्मण्यदेवं शरणं प्रपद्ये ॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारश्लोक 1
स्वरूपषडानन / शिवपुत्र
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जिनके 6 मुख हैं, शरीर पर चंदन का लेप है, ऐसे मयूर वाहन शिवपुत्र की मैं शरण लेता हूँ।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
भय से मुक्ति और ईश्वरीय सुरक्षा
विस्तृत लाभ
भय से मुक्ति और ईश्वरीय सुरक्षा।
जप काल
षष्ठी व्रत के दिन नित्य पाठ।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
अनन्तकोटिविष्णुलोकनम्रपद्मजार्चिते हिमाद्रिजापुलोमजाविरिञ्चिजावरप्रदे। अपारसिद्धिरिद्धिदिग्दिगन्तकीर्तिदिगधमे कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥
भद्रकाल्यै नमो नित्यं सरस्वत्यै नमो नमः। वेदवेदाङ्गवेदान्तविद्यास्थानेभ्य एव च॥
ॐ विश्वाकाराय नमः
ॐ श्रीनिवासाय नमः
ऋतं च मेऽमृतं च मेऽयक्ष्मं च मेऽनामयच्च मे...
ॐ दामोदराय विद्महे रुक्मिणीवल्लभाय धीमहि तन्नो कृष्णः प्रचोदयात् ॥