शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
हनुमान मंत्र
ॐ यज्ञस्वरूपिणे नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-मंत्र
स्वरूपसाक्षात् यज्ञ
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो स्वयं यज्ञ के मूर्तिमान स्वरूप हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
यज्ञ फल
विस्तृत लाभ
यज्ञ फल
जप काल
यज्ञ के समय
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ कामिने नमः।
ॐ श्रीं ह्रीं ह्स्सौः हूँ फट् नील सरस्वत्यै स्वाहा।
ॐ कृष्णानन्दविवर्धिन्यै नमः
ॐ कपिसेनानायकाय नमः
यामिषुं गिरिशन्त हस्ते बिभर्ष्यस्तवे। शिवां गिरित्र तां कुरु मा हिंसीः पुरुषं जगत्॥
अहं सुवे पितरमस्य मूर्धन् मम योनिरप्स्वन्तः समुद्रे। ततो वि तिष्ठे भुवनानु विश्वोतामूं द्यां वर्ष्मणोप स्पृशामि॥