शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
हनुमान मंत्र
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये सर्वभूतान्तरात्मा तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारऔपनिषदिक ध्यान मंत्र।
स्वरूपसर्वभूत-अन्तरात्मा
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो सभी प्राणियों के भीतर स्थित अन्तरात्मा हैं, उन राम को नमन।
जप काल
ध्यान-साधना, मोक्ष-कामना हेतु एकांत में मानसिक जप।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं भगवति भवानि देवि स्वाहा॥
ॐ कबन्धवनवासिन्यै नमः
ॐ सुराध्यक्षाय नमः
सिन्दूराभमिभाननं त्रिनयनं च पाशाङ्कुशौ बिभ्राणं मधुमत्कपालमनिशं साद्विन्दुमौलिं भजे । पुष्ट्या श्लिष्टतनुं ध्वजाग्रकरया पद्मोल्लसद्धस्तया तद्योन्याहितपाणिमात्तवसुमत पात्रोल्लसत्पुष्करम् ॥
ॐ जिह्वां कृष्णप्रिया तथा।
ॐ मौञ्जीभृते नमः