कार्तिकेय मंत्र
घ्राणं पातु महालक्ष्मीः कण्ठं पातु सरस्वती। भुजौ तु पातु वरदा हृदय पातु सुन्दरी॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
नासिका की महालक्ष्मी, कंठ की सरस्वती, भुजाओं की वरदा और हृदय की रक्षा सुंदरी देवी करें 45।
इस मंत्र से क्या होगा?
वाणी, श्वसन और हृदय की आध्यात्मिक व भौतिक रक्षा
विस्तृत लाभ
वाणी, श्वसन और हृदय की आध्यात्मिक व भौतिक रक्षा।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ वागधिष्ठातृदेव्यै सर्वाङ्गं मे सदाऽवतु। (स्वरूप: वागधिष्ठात्री | लाभ: संपूर्ण शरीर की आध्यात्मिक और भौतिक रक्षा | अर्थ: वाक् की अधिष्ठात्री देवी मेरे संपूर्ण अंगों की रक्षा करें) 8
एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता। लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी॥ वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा। वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥
ॐ योगिने नमः
नमो नमस्तुभ्यम् असह्यवेग-शक्तित्रयायाखिल-धीगुणाय
ॐ महापुरुषाय नमः
ॐ प्रजापतये नमः