शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कार्तिकेय मंत्र
ॐ हरिस्वरूपाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारयुगल-नाम मन्त्र; ये मन्त्र गोलोक धाम के अधिष्ठाता श्री राधा-कृष्ण के संयुक्त लीला-माधुर्य का प्रतिनिधित्व करते हैं।
स्वरूपताप-हारी
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
पापों का हरण करने वाले हरि-स्वरूप को नमस्कार।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
सम्पूर्ण पाप नाश
विस्तृत लाभ
सम्पूर्ण पाप नाश
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ वासिष्ठादिमुनिश्रेष्ठवन्दिताय नमः
ॐ कर्पूरमालाभरणायै नमः
अभयवरदहस्तः पाशदन्ताक्षमाला सृणिपरशुदधानो मुद्गरं मोदकं च । फलमधिगत सिंहः पञ्चमातङ्गवक्त्रो गणपतिरतिगौरः पातु हेरम्बनामः ॥
खों खं खं फट् प्राण-ग्रासी प्राण-ग्रासी हुं फट् सर्वशत्रुसंहारणां शरभशालुवाय पक्षिराजाय हुं फट् स्वाहा।
ॐ अनादये नमः
ॐ शास्त्ररूपिण्यै नमः