शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कार्तिकेय मंत्र
ॐ महातेजसे नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपमहा-तेजस्वी
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
महान तेज और अग्नि के समान प्रताप से परिपूर्ण भगवान को नमन।
जप काल
नित्य प्रातः काल, लाल आसन पर बैठकर रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला से 108 नामों का क्रमशः उच्चारण करते हुए पुष्प अर्पित करें।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
जो दुष्टों के दमन हेतु भयंकर परशु (फरसा) धारण करते हैं, उन्हें नमस्कार। (लाभ: शत्रुओं से रक्षा) 19।
ॐ क्षेत्रज्ञाय नमः।
स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारु गङ्गा। लसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजङ्गा॥
ॐ भवरोगस्यभेषजाय नमः
ॐ यमुनावेगसंहारिणे नमः
विद्यार्थी लभते विद्यां, धनार्थी लभते धनम् । पुत्रार्थी लभते पुत्रान्, मोक्षार्थी लभते गतिम् ॥