शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कार्तिकेय मंत्र
ॐ निर्गुणाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
स्वरूपनिर्गुण ब्रह्म
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो त्रिगुणमयी माया (सत्त्व, रज, तम) के गुणों से पूर्णतः परे हैं, उन्हें नमस्कार है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
मायातीत अवस्था
02
सांसारिक आकर्षणों से निर्लिप्त रहकर जीवन जीने की कला
विस्तृत लाभ
मायातीत अवस्था; सांसारिक आकर्षणों से निर्लिप्त रहकर जीवन जीने की कला।
इसे भी पढ़ें
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र