शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कार्तिकेय मंत्र
ॐ पिङ्गलाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपपिंगल
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
स्वर्ण के समान कांति वाले भगवान को नमन।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
शारीरिक तेज और आकर्षण में वृद्धि
विस्तृत लाभ
शारीरिक तेज और आकर्षण में वृद्धि।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ नमस्ते गणपतये ॥ त्वमेव प्रत्यक्षं तत्त्वमसि ॥ त्वमेव केवलं कर्ताऽसि ॥ त्वमेव केवलं धर्ताऽसि ॥ त्वमेव केवलं हर्ताऽसि ॥ त्वमेव सर्वं खल्विदं ब्रह्मासि ॥ त्वं साक्षादात्माऽसि नित्यम् ॥
ऐमित्येकाक्षरो मन्त्रो मम कण्ठं सदाऽवतु। (स्वरूप: एकाक्षरी बीज | लाभ: कंठ, स्वर-तंत्र और विशुद्धि चक्र की रक्षा, संगीतकारों के लिए अति उत्तम | अर्थ: 'ऐं' रूपी एकाक्षर मन्त्र मेरे कंठ की सदा रक्षा करे) 8
सभासु वदतां श्रेष्ठो राज्ञां भवति च प्रियः। वैदिकं तान्त्रिकं चैव मान्त्रिकं ज्ञानमुत्तमम्॥
ॐ सुरभ्यै नमः
ॐ जनार्दनाय नमः
ॐ शुद्धविग्रहाय नमः