कार्तिकेय मंत्र
ॐ महासारस्वतावृताय नमः
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
इस मंत्र का अर्थ
महान सारस्वत (ज्ञान और वाग्मिता) से घिरे देव को नमन।
इस मंत्र से क्या होगा?
वाक्-सिद्धि और प्रखर भाषण कला
विस्तृत लाभ
वाक्-सिद्धि और प्रखर भाषण कला।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
पाँचों त्रिशेम चलें, लांगुरिया सलार चलें। भीम की गदा चले, हनुमान की हाँक चले। नाहर की धाक चलै, नहीं चलै, तो हजरत सुलेमान के तखत की दुहाई है। एक लाख अस्सी हजार पीर व पैगम्बरों की दुहाई है। चलो मन्त्र, ईश्वर वाचा। गुरु का शब्द साँचा।
ॐ सर्वसिद्धिदाय नमः
ॐ शब्दब्रह्मस्वरूपिण्यै नमः
वसुन्धरे श्री वसुधे वसुदोग्ध्रे कृपामयि! त्वत्कुक्षिगतं सर्वस्वं शीघ्रं मे त्वं प्रदर्शय॥
सर्वसुगन्धिसुलेपितलिङ्गं बुद्धिविवर्धनकारणलिङ्गम्। सिद्धसुरासुरवन्दितलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्॥
करस्थ कदली चूत पनसेक्षुक मोदकम्। बालसूर्य प्रभाकारं वन्देऽहं बालगाणपतिम्॥