शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
ब्रह्मपुत्री गायत्री
ॐ सरस्वत्यै च विद्महे ब्रह्मपुत्र्यै च धीमहि। तन्नो देवी प्रचोदयात्॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारगायत्री मन्त्र
स्वरूपब्रह्मपुत्री सरस्वती
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
हम ब्रह्मा की पुत्री सरस्वती को जानते हैं, उनका ध्यान करते हैं। वे देवी हमारी बुद्धि को ज्ञान की ओर प्रेरित करें।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
सर्वाधिक शक्तिशाली गायत्री मन्त्रों में से एक
02
प्रज्ञा, स्मरण-शक्ति और ज्ञान के तीव्र विकास के लिए
विस्तृत लाभ
सर्वाधिक शक्तिशाली गायत्री मन्त्रों में से एक; प्रज्ञा, स्मरण-शक्ति और ज्ञान के तीव्र विकास के लिए।
जप काल
प्रात:काल सूर्योदय के समय स्फटिक माला से 108 बार जप।
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