कार्तिकेय मंत्र
ॐ सर्वात्मने नमः
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
जो इस ब्रह्मांड के समस्त चर-अचर जीवों के मूल प्राण (आत्मा) हैं, उन्हें नमस्कार है।
इस मंत्र से क्या होगा?
समदृष्टि का विकास
समस्त जीवों के प्रति बिना भेदभाव के निस्वार्थ प्रेम
विस्तृत लाभ
समदृष्टि का विकास; समस्त जीवों के प्रति बिना भेदभाव के निस्वार्थ प्रेम।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं गं गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा ॥
ॐ महोदराय नमः
ॐ वामनाय नमः
ॐ ह्रः ॐ सौं ॐ वैं ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीजयजय चण्डिकायै नमः। ॐ स्वीं स्वीं विध्वंसय विध्वंसय ॐ प्लूं प्लूं प्लावय प्लावय... (अति विस्तृत तांत्रिक शृंखला)... ॐ चामुण्डायै विच्चे स्वाहा। मम सकल मनोरथं देहि देहि, सर्वोपद्रवं निवारय निवारय... भञ्जय भञ्जय ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं स्वाहा॥
ॐ ह्रीं भीषण भैरवाय सर्व शाप निवारणाय मम वशं कुरु कुरु स्वाहा।
ॐ कारणामृतसन्तोषायै नमः