महागणपति मूल मंत्र (28 अक्षर)
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं गं गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा ॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
हे वरदान देने वाले महागणपति, संपूर्ण जनमानस को मेरे अनुकूल (वशीभूत) करें।
इस मंत्र से क्या होगा?
संपूर्ण भौतिक ऐश्वर्य, राज-सम्मान, वशीकरण और त्रैलोक्य विजय
विस्तृत लाभ
संपूर्ण भौतिक ऐश्वर्य, राज-सम्मान, वशीकरण और त्रैलोक्य विजय।
जप काल
गुरु-दीक्षा के पश्चात, 4 लाख जप (पुरश्चरण) और तर्पण विधान 28।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ अच्युताय नमः
ॐ श्रीं कृष्णाय श्रीं । श्रीं श्रीं गोविन्दाय गोपालाय गोलोक सुन्दराय सत्याय नित्याय परमात्मने पराय वैखानसाय विराजमूर्तये मेघात्मने श्रीम नरसिंहवपुषे नमः
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे। ॐ ग्लौं हुं क्लीं जूं सः ज्वालय ज्वालय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा॥
भयार्तस्वजनत्राणतत्परं धर्मतत्परम्। गतगर्वप्रियं शूरं जमदग्निसुतुं मतम्॥
ॐ श्रीं ह्रीं रां रामाय नमः
ॐ नारसिंहाय नमः