कार्तिकेय मंत्र
ॐ शुभकराय नमः
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
सबका शुभ और कल्याण करने वाले को नमन।
इस मंत्र से क्या होगा?
कार्यों में शुभता और विघ्नों का अंत
विस्तृत लाभ
कार्यों में शुभता और विघ्नों का अंत।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ सुमङ्गल्यै नमः
ॐ श्रीं ह्रीं भगवत्यै स्वाहा नेत्रयुग्मं सदाऽवतु। (स्वरूप: भगवती | लाभ: नेत्रों और सूक्ष्म दृष्टि की रक्षा | अर्थ: श्रीं ह्रीं स्वरूपा भगवती मेरे दोनों नेत्रों की रक्षा करें) 8
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये ओङ्कारः तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
इडा देवहूर्मनुर्यज्ञनीर्बृहस्पतिरुक्थामदानि शंसिषद् विश्वेदेवाः सूक्तवाचः पृथिविमातर्मा मा हिंसीर्मधु मनिष्ये मधु जनिष्ये मधु वक्ष्यामि मधु वदिष्यामि मधुमतीं देवेभ्यो वाचमुद्यासँशुश्रूषेण्यां मनुष्येभ्यस्तं मा देवा अवन्तु शोभायै पितरोऽनुमदन्तु॥
दयासुदृष्टिं कुरुतां मयि श्रीः! सुवर्णदृष्टिं कुरु मे गृहे श्रीः॥
ॐ कलनादनिनादस्थायै नमः