शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कार्तिकेय मंत्र
ॐ शुचये नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-मंत्र
स्वरूपनिष्पाप
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो अग्नि के समान निर्मल और पूर्णतः पवित्र हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
पवित्रता
विस्तृत लाभ
पवित्रता
जप काल
स्नानोपरांत
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ ह्रीं सरस्वत्यै स्वाहा शिरो मे पातु सर्वतः। (स्वरूप: ह्रीं-स्वरूपा सरस्वती | लाभ: मस्तिष्क और सहस्रार चक्र की सभी दिशाओं से रक्षा | अर्थ: ह्रीं बीज रूपी सरस्वती मेरे सिर की सब ओर से रक्षा करें) 8
ॐ कमलायै नमः
ॐ पादतलं गोपी पातु।
ॐ कमलासनवासिन्यै नमः
ॐ महागणेशाय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि । तन्नो दन्ती प्रचोदयात् ॥
प्रतीच्यां उन्मत्त भैरवाय नमः प्रतीच्यां मां रक्ष रक्ष काल कंटकान् भक्ष भक्ष आवाहयाम्यहं इत्र तिष्ठ तिष्ठ हुं फट् स्वाहा।