शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कार्तिकेय मंत्र
ॐ वरीयाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-मंत्र
स्वरूपसर्वश्रेष्ठ
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो समस्त लोकों में सर्वश्रेष्ठ और महानतम हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
उच्च पद
विस्तृत लाभ
उच्च पद
जप काल
नित्य
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
अनङ्गरङ्गमङ्गलप्रसङ्गभङ्गुरभ्रुवां सविभ्रमससम्भ्रमदृगन्तबाणपातनैः। निरन्तरं वशीकृतप्रतीतनन्दनन्दने कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥
द्विषड्भुजं द्वादशदिव्यनेत्रं त्रयीतनुं शूलमसिं दधानम् । शेषावतारं कमनीयरूपं ब्रह्मण्यदेवं शरणं प्रपद्ये ॥
ॐ यशस्कर्यै नमः
ॐ अनन्तनित्यायै नमः
ॐ साधकानन्दसन्तोषायै नमः
रत्नपादुकाप्रभाभिरामपादयुग्मकं नित्यमद्वितीयमिष्टदैवतं निरञ्जनम्।