मंत्रराज पद स्तोत्र मंत्र
वृत्तोत्फुल्लविशालाक्षं विपक्षक्षयदीक्षितम्। निनादत्रस्तविश्वाण्डं विष्णुमुग्रं नमाम्यहम्॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
जिनकी विशाल आँखें पूरी तरह खुली हुई हैं, जो शत्रुओं के नाश हेतु संकल्पित हैं, और जिनकी गर्जना से संपूर्ण ब्रह्मांड भयभीत है, उन उग्र विष्णु को मैं नमस्कार करता हूँ।
इस मंत्र से क्या होगा?
आयु, विद्या और ऐश्वर्य की वृद्धि
भयंकर शत्रुओं का दमन
विस्तृत लाभ
आयु, विद्या और ऐश्वर्य की वृद्धि। भयंकर शत्रुओं का दमन।
जप काल
त्रिसंध्या (प्रातः, मध्याह्न, सायं) में भगवान शिव द्वारा रचित इस स्तोत्र का पाठ।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ महा काल्यै च विद्महे श्मशान वासिन्यै च धीमहि तन्नो काली प्रचोदयात
शरजन्मा गणाधीश पूर्वजो मुक्तिमार्गकृत् । सर्वागमप्रणेता च वाञ्छितार्थप्रदर्शनः ॥
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये विद्या तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ अग्रगामिने नमः
ॐ नवदुर्गायै नमः ॐ महाकाल्यै नमः ॐ ब्रह्माविष्णुशिवात्मिकायै नमः।
ॐ वरीयाय नमः