शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीकृष्ण मंत्र
ॐ आत्मवते नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारयुगल-नाम मन्त्र; ये मन्त्र गोलोक धाम के अधिष्ठाता श्री राधा-कृष्ण के संयुक्त लीला-माधुर्य का प्रतिनिधित्व करते हैं।
स्वरूपपरमात्म स्वरूप
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
मन और आत्मा के परम नियंता को नमस्कार।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
आत्म-नियंत्रण
विस्तृत लाभ
आत्म-नियंत्रण
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ॐ महेश्वर्यै नमः
ॐ दक्षाध्वरहराय नमः
वसुन्धरे श्री वसुधे वसुदोग्ध्रे कृपामयि! त्वत्कुक्षिगतं सर्वस्वं शीघ्रं मे त्वं प्रदर्शय॥
श्री राम जय राम कोदण्ड राम
ॐ शृतं मे मा प्रहासीः अनेनाधीतेनाहोरात्रान्सन्दधामि ऋतं वदिष्यामि सत्यं वदिष्यामि। तन्मामवतु तद्वक्तारमवतु अवतु मामवतु वक्तारमवतु वक्तारम्। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥