शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्री राधा मंत्र
ॐ कृष्णशक्त्यै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारसहस्रनाम जप मंत्र;
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो कृष्ण की मूल शक्ति हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
आंतरिक शक्तियों का जागरण
विस्तृत लाभ
आंतरिक शक्तियों का जागरण।
जप काल
तुलसी या कमलगट्टे की माला पर जप;
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ॐ अत्रिसुतायै नमः
ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ॥
ॐ श्रीवत्सकौस्तुभधराय नमः
कविजिह्वाग्रवासिन्यै स्वाहा मां वारुणेऽवतु। (अर्थ: कवियों की जिह्वा में बसने वाली देवी पश्चिम में रक्षा करें) 8
दिग्घस्तिभिः कनककुम्भमुखावसृष्ट स्वर्वाहिनी विमलचारुजलप्लुताङ्गीम्। प्रातर्नमामि जगतां जननीमशेष लोकाधिनाथगृहिणीममृताब्धिपुत्रीम्॥
ॐ घनश्यामाय नमः