शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीकृष्ण मंत्र
ॐ अनादिब्रह्मचारिणे नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-जप मन्त्र; ये मन्त्र वासुदेव, बाल-गोपाल, और द्वारकाधीश स्वरूपों का पूर्ण प्रतिनिधित्व करते हैं।
स्वरूपनैष्ठिक ब्रह्मचारी
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
अनादि काल से ब्रह्मचर्य व्रत (आत्माराम) का पालन करने वाले को नमस्कार।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
ब्रह्मचर्य पालन हेतु
विस्तृत लाभ
ब्रह्मचर्य पालन हेतु
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ मदोत्कटाय नमः
ॐ सरस्वत्यै स्वाहेति श्रोत्रं पातु निरन्तरम्। (स्वरूप: सरस्वती | लाभ: कानों, श्रवण-शक्ति व नाद-ग्रहण की रक्षा | अर्थ: सरस्वती मेरे कानों की निरंतर रक्षा करें) 8
ॐ श्रीमते नमः
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं महालक्ष्मि महालक्ष्मि एहि एहि सर्वसौभाग्यं देहि मे स्वाहा।
ध्यायेच्च तामस क्षत्र रुधिर रक्त परश्वधम्। रक्त नेत्रं करस्थं ब्रह्म सूत्रं यम प्रभम्॥
ॐ रावणेशस्तोत्रसाममनोहराय नमः