शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीकृष्ण मंत्र
ॐ पिशिताशप्रभञ्जनाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपरक्षक
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
राक्षसों (मांस-भक्षियों) का विनाश करने वाले देव को नमन।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
नकारात्मक ऊर्जा और तंत्र-बाधा का शमन
विस्तृत लाभ
नकारात्मक ऊर्जा और तंत्र-बाधा का शमन।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ सुधाकलशहस्ताय नमः
या श्रीः स्वयं सुकृतिनां भवनेष्वलक्ष्मीः पापात्मनां कृतधियां हृदयेषु बुद्धिः। श्रद्धा सतां कुलजनप्रभवस्य लज्जा तां त्वां नताः स्म परिपालय देवि विश्वम्॥ 18
ॐ निवृत्तात्मने नमः
ॐ भूतभृते नमः
नमो भगवते फट् भैरवाय... आकर्षय-2 आवेशय-2 मोहय-2 भ्रामय-2... ह्रां ह्रीं त्रिपुरतांडवाय अष्टभैरवाय भाषय-2 स्वाहा।
ह्रीं विद्याधिष्ठातृदेव्यै स्वाहा ओष्ठं सदाऽवतु। (स्वरूप: विद्याधिष्ठात्री | लाभ: होठों और उच्चारण स्थान की रक्षा | अर्थ: विद्या की अधिष्ठात्री देवी मेरे होंठों की सदा रक्षा करें) 8