शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीकृष्ण मंत्र
तमीश्वराणां परमं महेश्वरं तं देवतानां परमं च दैवतम्
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
हम उन ईश्वरों के भी परम महेश्वर और देवताओं के भी परम देवता को जानते हैं
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ वर्णाश्रयप्रदाय नमः
ॐ कष्टहर्त्र्यै नमः
ॐ रुक्मिण्यै नमः
ॐ भक्ताकाराय नमः
अधरौष्ठं हृषीकेशो दन्तपंक्तिं गदाग्रजः । रासेश्वरश्च रसनां तालुकं वामनो विभुः ॥
ह्रीं विद्याधिष्ठातृदेव्यै स्वाहा ओष्ठं सदाऽवतु। (स्वरूप: विद्याधिष्ठात्री | लाभ: होठों और उच्चारण स्थान की रक्षा | अर्थ: विद्या की अधिष्ठात्री देवी मेरे होंठों की सदा रक्षा करें) 8