शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीकृष्ण मंत्र
ॐ वनमालिने नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-जप मन्त्र; ये मन्त्र वासुदेव, बाल-गोपाल, और द्वारकाधीश स्वरूपों का पूर्ण प्रतिनिधित्व करते हैं।
स्वरूपवनमाली
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
गले में वनमाला धारण करने वाले को नमस्कार।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
प्रकृति-प्रेम
विस्तृत लाभ
प्रकृति-प्रेम
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
धृत पाशाङ्कुश कल्पलता स्वरदश्च बीजपूरयुतः । शशिशकल कलितमौली त्रिलोचनोऽरुणश्च गजवदनः ॥ भासुरभूषण दीप्तो बृहदुदर पद्म विष्टरोल्लसितः । विघ्नपयोधरपवनः करधृत कमलः सदास्तु भूत्यै ॥
जिन्होंने धर्म-विरोधी आतातायी क्षत्रियों पर विजय प्राप्त की, उन्हें नमस्कार। (लाभ: प्रतिस्पर्धियों पर विजय) 19।
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये एकादशरुद्राः तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ कस्तूरीमृगतोषिण्यै नमः
ॐ वां रौं अलुप्तशक्तिधाम्ने सद्योजातात्मने कनिष्ठिकाभ्यां नमः
ॐ कपीश्वराय नमः