शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
सिद्ध कुंजिका तांत्रिक महामंत्र
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे। ॐ ग्लौं हुं क्लीं जूं सः ज्वालय ज्वालय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारतांत्रिक कुंजिका / माला मंत्र |
स्वरूपमहाकाली (चण्डी)
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
दुर्गा सप्तशती के सम्पूर्ण पाठ का फल मात्र इसके जप से प्राप्त होता है
02
मारण, मोहन, वशीकरण और उच्चाटन आदि तांत्रिक सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं
विस्तृत लाभ
दुर्गा सप्तशती के सम्पूर्ण पाठ का फल मात्र इसके जप से प्राप्त होता है। मारण, मोहन, वशीकरण और उच्चाटन आदि तांत्रिक सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं 22।
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