शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ लक्ष्मी मंत्र
ॐ द्विवर्णाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपशिव-शक्ति
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
द्विवर्ण (प्रकृति-पुरुष) स्वरूप को नमन।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
जीवन में संतुलन और द्वंद्वों से मुक्ति
विस्तृत लाभ
जीवन में संतुलन और द्वंद्वों से मुक्ति।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
नमस्ते परमेशानि रासमण्डलवासिनी। रासेश्वरि नमस्तेऽस्तु कृष्ण प्राणाधिकप्रिये॥
ॐ कुमारीरूपधारिण्यै नमः
विष्णुप्रिये! रत्नगर्भे! समस्तफलदे शिवे! त्वद्गर्भगतहेमादीन् सम्प्रदर्शय दर्शय॥
ॐ वसवे नमः
ॐ बुद्धिदात्र्यै नमः
हस्तीन्द्राननमिन्दुचूडमरुणच्छायं त्रिनेत्रं रसात् आलिष्टं प्रियया सपद्मकरया स्वाङ्कस्थया सन्ततम् । बीजपूर गदेक्षु कार्मुकलसच्चक्राब्ज पाशोत्पल व्रीह्यग्रस्वविषाण रत्नकलशान् हस्तैर्वहन्तं भजे ॥