शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ लक्ष्मी मंत्र
ॐ वसवे नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
सभी तत्वों के अंतिम आश्रय
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
मूलभूत आवश्यकताओं की निर्विघ्न पूर्ति
विस्तृत लाभ
मूलभूत आवश्यकताओं की निर्विघ्न पूर्ति 82
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ परमडम्भाय नमः
ॐ उदरं सुबलस्वसा पातु।
पाँचों त्रिशेम चलें, लांगुरिया सलार चलें। भीम की गदा चले, हनुमान की हाँक चले। नाहर की धाक चलै, नहीं चलै, तो हजरत सुलेमान के तखत की दुहाई है। एक लाख अस्सी हजार पीर व पैगम्बरों की दुहाई है। चलो मन्त्र, ईश्वर वाचा। गुरु का शब्द साँचा।
ॐ नाभिं मे पातु नरहरिः स्वनाभिब्रह्मसंस्तुतः
ॐ ह्रीं श्रीं क्रीं श्रीं क्रीं क्लीं श्रीं महालक्ष्मी मम गृहे धनं पूरय पूरय चिंतायै दूरय दूरय स्वाहा।
ॐ भिन्नलोहाय नमः