शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ लक्ष्मी मंत्र
ॐ जगच्चक्राय स्वाहा – शिखायै वषट्
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपशिखा-न्यास / जगच्चक्र
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जगत-चक्र को स्वाहा, वे मेरी शिखा में स्थित हों। (ब्रह्मरंध्र की ऊर्जा का संरक्षण)।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ लङ्किनीभञ्जनाय नमः
जो अत्यंत तेजस्वी और महाप्रतापी हैं, उन्हें नमस्कार। (लाभ: व्यक्तित्व में तेज और ओज की वृद्धि) 19।
उपैतु मां देवसखः कीर्तिश्च मणिना सह। प्रादुर्भूतोऽस्मि राष्ट्रेऽस्मिन् कीर्तिमृद्धिं ददातु मे॥
ॐ कामिने नमः
मनोबुद्ध्यहंकार चित्तानि नाहं... चिदानन्दरूपः शिवोऽहम् शिवोऽहम्॥
ॐ नखान् चन्द्रमुखी पातु।